Tuesday, July 1, 2008

कोई मेरे दर्द को क्यों नहीं समझता

कितना मुश्किल है किसी और की मौजूदगी के साथ रहना

कितना मुश्किल है किसी की दूसरी पसंद बन कर रहना

कितना मुश्किल है वो सारे आधे सच और आधे झूट के साथ रहना

कितना मुश्किल है इक बार और बार बार धोखा खाने के बाद भरोसा करना

मुझसे जो बन पड़ा मैंने किया, अपने से ही हर पल जूझता रहता हूँ, टूटता रहता हूँ और समेटता रहता हूँ

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