कितना मुश्किल है किसी और की मौजूदगी के साथ रहना
कितना मुश्किल है किसी की दूसरी पसंद बन कर रहना
कितना मुश्किल है वो सारे आधे सच और आधे झूट के साथ रहना
कितना मुश्किल है इक बार और बार बार धोखा खाने के बाद भरोसा करना
मुझसे जो बन पड़ा मैंने किया, अपने से ही हर पल जूझता रहता हूँ, टूटता रहता हूँ और समेटता रहता हूँ
Tuesday, July 1, 2008
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